कोचर गोत्र | माँ विशलामाता

॥ श्री विशला नित्य स्मरण ॥

॥ पाठमाला ॥

विशला देवी माता को, नमन करू कर जोड़।
मन वांछित आशा फले, सफल भये मुझ काज ॥1॥

तुम नामे चिंता हटे, रोग शोक मिट जाय।
तुम नामे दारिद टले, रिद्धि सिद्धि मिल जाय ॥2॥

फलवद्ध से आप पधारे, श्री उरझोजी के साथ में।
रास्ता बीच आप विराजे, करमीसर के ग्राम में ॥3॥

जय विशला देवी मात

गायन – 2

जय विशला देवी मात,
तुझ मोहनी मूरति मुझ हृदय विराजे जी,
तेरी सूरति तेरी मूरति मन लुभावनी,
हाँ रे दिल ललचावन जी ॥ जय ॥1॥

कश्मीसर में आप विराजे,
सुन्दर जंगल बच तेरी मूरति दर्शन करते।
आते भक्त अनेक ॥ जय ॥2॥

खूब ठाठ से बड़े प्रेम से आते भक्त अनेक,
भक्ति-भाव से प्रेरित होकर,
आते पैदल अनेक ॥ जय ॥3॥

प्रसाद लाते, भक्ति गान करते,
पूजा बड़े ठाठ से करते।
श्री तुझ मूरति निरख-निरख कर
हृदय में आनंद भरते ॥ जय ॥4॥

भावावेश में लीन होकर, मांगते फल अनेक,
आशा फलावो मुझ वंछित देवी,
विशला देवी मात ॥ जय ॥5॥

माँ तुझ नाम से सुख संपदा पाऊं,
पाऊं बहुतायत राज।
तुझ नाम से अष्ट-सिद्धि,
नवनिधि मिल जाये देवी राज ॥ जय ॥6॥

दास "राम" की अरज यही है,
कर-बद्ध विशलादेवी माता।
धन्य-धान्य से परिपूर्ण कर दो,
सकल भक्त जनो (संवत् 2010) कुलदेवी मात ॥ जय ॥7॥

॥ श्री विशला नित्य स्मरण ॥

चौपाई – 3

विशल मात नमूं शिरनामी।
हूं गाऊं तेरी विनती माई ॥1॥

भक्त जन जपे जाप सह कोई।
ता घर शान्ति सदा सुख होई ॥2॥

विशला जपीने कीजे कामा।
सोही काम हुए तत्काला ॥3॥

विशला जपी परदेश सिधावे।
ते घर लक्ष्मी बहु बेगा लावे ॥4॥

जा नर को विशालमात सहाई।
ता नर को कुछ आरती नाहीं ॥5॥

जो कछु वंछे सोही पूरे।
दारिद दुःख कुबुद्धि चूरे ॥6॥

सागर जैसी मात गंभीरा।
दोष नहीं तुझ माँही शरीरा ॥7॥

तेरी महिमा अद्भुत कहिये।
तेरे गुण को पार न लहिये ॥8॥

कर जोड़ी "राम" गुण गावे।
ऋद्धि सिद्धि बहु बेगा पावे ॥9॥

नोट :
घर से बाहर किसी कार्य की पूर्णता की इच्छा से जाते समय,
इस छन्द का मनन करके जाने से
अभिलषित कार्य अवश्य पूर्ण होता है — ऐसा ज्ञानियों का कथन है।

॥ श्री विशला नित्य स्मरण ॥

गायन – 4

विशला विशला मैं पुकारूं,
हर घड़ी हर काम में ॥ टेर ॥

तेरी कृपा से देवीजी,
सफल होऊं सब काम में ॥ विशला ॥

भक्तजनों के आह्वान को,
शीघ्र ही सुन लीजिये।
विश्वशांति संदेश को,
घर-घर फैला दीजिये ॥ विशला ॥

विद्या, बुद्धि, बल पौरुष,
त्याग संयम दीजिये।
हम बालकों की नसों में,
वीरता भर दीजिये ॥ विशला ॥

संगठन और प्रेम का हमें,
पाठ सीखा दीजिये।
विश्व बन्धुत्व की भावना,
रंग-रंग में भर दीजिये ॥ विशला ॥

॥ श्री विशला नित्य स्मरण ॥

आरती

ॐ जय जय विशाला माता ॥ टे॥
कमल नयनी महिष वाहिनी,
ॐ जय जय विशला माता ॥ ॐ जय ॥

संकट विमोचन दुःख हरण मैया,
सुख सम्पति की दाता।
ॐ मैया सुख सम्पति की दाता ॥ ॐ जय ॥

चिन्ता निवारण रोगहरण मैया,
आनंद मंगल की दाता।
ॐ मैया आनंद मंगल की दाता ॥ ॐ जय ॥

माँ तुम सेवा से मनवांछित आश फले,
मैया पाऊं सुफल बहुने का ॥ ॐ जय ॥

तुझ आरती करता चिन्ता हटे,
सब पाऊं ऋद्धि सिद्धि बहुने का ॥ ॐ जय ॥

कर जोड़ी "राम" गुण गावे,
पावे सुख सम्पति नेका ॥ ॐ जय ॥

मन्त्र

ॐ ह्रीं श्री मम कुल देवी विशला माता
सर्व कार्येषु सिद्धि कर कुरु ।

उपर्युक्त मन्त्र को माला पर प्रतिदिन गिनते रहने से
समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।