कोचर गोत्र | माँ विशलामाता

॥ विशाला माँ की स्तुति ॥

श्री विशाला देवी माँ कोचर कुल की,
मम हृदय कमलवासिनी।
कोटि-कोटि वंदन कुलदेवी को,
सुखदायिनी, दुःखनाशिनी ॥

हर कामना होती सफल,
कृपादृष्टि जिनकी पड़ी।
कठिन भवसागर से उबारे,
माँ विशाला करुणा भरी ॥

उरझोजी संग आई माता,
फलौदी से करमीसर धाम।
रेत के टीले पावन हो गये,
जली ज्योति, हुआ विश्राम ॥

बीस भुजा, महिष वाहिनी,
अस्त्र-शस्त्र शोभित अंग।
मातृ मूरत देख-देख कर,
पुलकित होता जन-जन ॥

जो भी माँ का नाम जपे,
भय, शोक सब दूर हो जाए।
विशाला माँ की महिमा गाए,
जीवन धन्य बन जाए ॥

॥ भजन ॥

(तरज : ओ माँ ओ माँ)

ओ माँ ओ माँ,
तू कितनी भोली है, तू कितनी प्यारी है,
न्यारी-न्यारी है ओ माँ ॥

माँ ममता की मूरत प्यारी,
आया हूँ माँ शरण तिहारी।
ले ले शरण में मुझको मैया,
रख दे तेरा हाथ ॥

मैं तर जाऊँगा, मैं ले जाऊँगा,
तेरा थोड़ा प्यार, ओ माँ ॥

सबकी नैया पार लगाये,
भटके हुओं को राह दिखाये।
संकट काटे, दुःखड़े मेरे,
जन्म-जन्म के माँ ॥

जो भी आया है शरण तिहारी,
माँ किया बेड़ा पार, ओ माँ ॥

आँचल की माँ छाँव तू रखना,
बच्चों का माँ ध्यान तू रखना।
‘भक्त’ भी है तेरा बालक,
हमको भूल न जाना ॥

हाथ तू सिर पे रख ध्यान मेरा,
रख दे तेरा प्यार, ओ माँ ॥

॥ भजन ॥

रह तुम्हारी देख देख कर,
अँखियाँ भर-भर आई।
अब तो मुझको दर्शन दे दो,
करमीसर की माई ॥

ओ मेरी करमीसर की माई,
मइया मुझे दर्शन दे दो ॥

मैं तो हूँ मजबूर मइया,
तेरी क्या मजबूरी।
हाथ पकड़ लो शरण में ले लो,
कर दो आशा पूरी ॥

हालत मेरी देख-देख कर,
हँसने लगा जमाना।
बीस-बीस हाथों वाली मेरी,
लाज बचाना ॥

मुझ जैसा कोई पापी,
तेरे दर पे न आया होगा।
और जो आया होगा,
खाली लौटाया न होगा ॥

मइया मुझे दर्शन दे दो ॥

॥ भजन ॥

(तरज : आज मैया घर आई)

आज मैया घर आई,
बड़ा ही शुभ दिन है।
सामने बैठी मैया,
हो रहा दर्शन है ॥

आई माँ, आई माँ,
आई आई माँ ॥

कानों के कुण्डल, चाँद-सूरज लगे,
सोने की नथनी माँ को खूब सजे।
लाल चुनरिया सिर पे,
चमक रही चम-चम है ॥

माथे की बिंदिया मोती जैसी लगे,
फूलों का गजरा हीरों जैसा लगे।
हाथों में पहने कंगना,
खनक रहा खन-खन है ॥

पैरों में पायल बाजे,
छन-छन की तान।
माँ की मूरत प्यारी,
लूटे भक्तों का मान ॥